नई दिल्ली: देश के चार राज्यों में हुए विधान परिषद यानी एमएलसी चुनावों के नतीजों में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। 28 सीटों में से 27 के परिणाम घोषित होने तक कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली थी, जबकि वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दूसरी वरीयता के मतों की गिनती जारी थी। घोषित नतीजों में भाजपा ने 13 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए के खाते में कुल 16 सीटें आईं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी चार सीटें जीत चुकी थी और एक सीट पर आगे थी। महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बिहार और कर्नाटक में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। इन नतीजों के पीछे गठबंधन में तालमेल की कमी से लेकर संगठन और उम्मीदवारों के चयन तक कई कारण बताए जा रहे हैं।
1. बिहार में महागठबंधन के बीच बिखराव
बिहार में आठ एमएलसी सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और वाम दलों के बीच एकजुटता की कमी दिखाई दी। तीनों दलों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे की स्थिति बनी।
कांग्रेस और आरजेडी ने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, दरभंगा शिक्षक, दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे। दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी चुनाव मैदान में थे। शुरुआत में आरजेडी ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था, लेकिन कांग्रेस के पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी खड़े करने के फैसले के बाद आरजेडी ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया। दरभंगा में सीपीएम ने भी प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इस मुकाबले में कांग्रेस के मदन मोहन झा को 2,187 वोट मिले, जबकि रामदेव राय को 1,498 और आरजेडी के कुमार राउत को 126 वोट मिले। कांग्रेस यह सीट जन सुराज के उम्मीदवार से 324 मतों के अंतर से हार गई। इस परिणाम को सहयोगी दलों के बीच तालमेल की कमी और वोटों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है।
बिहार में कांग्रेस का खाता नहीं खुला
बिहार की आठ एमएलसी सीटों में भाजपा ने तीन सीटें जीतीं। जेडीयू, आरजेडी और जन सुराज के खाते में एक-एक सीट आई, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को यहां कोई सीट नहीं मिली। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने चौथी बार जीत हासिल की।
2. जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी
कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की एक प्रमुख वजह संगठन की जमीनी स्थिति को भी माना जा रहा है। जिन राज्यों में एमएलसी चुनाव हुए, वहां पार्टी का स्थानीय संगठन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों एमएलसी सीटें हार गई।
कर्नाटक में भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) को एक सीट मिली। जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पांच बार के एमएलसी और विधान परिषद में उपनेता पुट्टन्ना को हराया। यह परिणाम कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम रहा, क्योंकि राज्य में उसकी सरकार है।
3. उम्मीदवारों के चयन में चूक
चुनाव में कांग्रेस की हार की एक अन्य वजह उम्मीदवारों के चयन को बताया जा रहा है। चुनावी विश्लेषण के मुताबिक, पार्टी कुछ सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में सफल नहीं रही, जिनके जीतने की संभावना अधिक मानी जा रही थी।
आरोप है कि उम्मीदवार चुनते समय स्थानीय समीकरणों, संगठन की ताकत और मतदाताओं के बीच प्रत्याशियों की स्वीकार्यता का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया। इसके विपरीत, दूसरे दलों ने अपने उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखा। हालांकि, उम्मीदवारों के चयन को हार की निर्णायक वजह मानने के लिए प्रत्येक सीट के नतीजों और स्थानीय परिस्थितियों का अलग-अलग आकलन जरूरी है।
4. राहुल गांधी के मुद्दे मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से बेरोजगारी, पेपर लीक, सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और वोट चोरी जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। पार्टी इन विषयों को अपने राजनीतिक अभियान में प्रमुखता देती रही है।
हालांकि, एमएलसी चुनाव के नतीजों से जुड़े विश्लेषण में यह सवाल उठाया जा रहा है कि इन मुद्दों को स्थानीय स्तर पर प्रभावी चुनावी अभियान में क्यों नहीं बदला जा सका। राष्ट्रीय राजनीति में उठाए गए मुद्दों को स्थानीय मतदाताओं तक पहुंचाने और उन्हें संगठनात्मक समर्थन में बदलने में कमी भी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की एक संभावित वजह मानी जा रही है।
5. कांग्रेस नेताओं के विवादित बयान
चुनाव के दौरान नेताओं के बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनते हैं। विश्लेषण में कांग्रेस नेताओं के कुछ विवादित बयानों को पार्टी के लिए नुकसानदेह बताया गया है। भाजपा ऐसे बयानों को अपने राजनीतिक प्रचार में मुद्दा बनाती रही है।
हाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद हुआ था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि खरगे ने प्रधानमंत्री के पिता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। इसी तरह, कांग्रेस नेता दानिश अली के वोट चोरी के मुद्दे पर दिए गए बयान को लेकर भी विवाद की चर्चा हुई।
हालांकि, इन बयानों और एमएलसी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच सीधे संबंध की पुष्टि के लिए अलग से प्रमाण जरूरी हैं। चुनाव परिणामों से इतना स्पष्ट है कि पार्टी को कई राज्यों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली और उसके संगठन, उम्मीदवार चयन तथा सहयोगी दलों के साथ तालमेल पर सवाल उठे हैं।
